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आज़ादी से पहले स्वयं महादेव ने बचाई थी इस अँगरेज़ अफसर की जान ! || कलियुग की कथाएं भाग – 0७

आज़ादी से पहले स्वयं महादेव ने बचाई थी इस अँगरेज़ अफसर की जान ! || कलियुग की कथाएं भाग – 0७


नमस्कार दोस्तो हम आपका स्वागत करते है। भगवान शिव की महिमा जितनी अपार है उतनी अनोखी है। उनकी चमत्कारो की कथा समस्त प्राणिओ ऋण भगवान शिवजी ही है। फिर चाहे कोई भारतीय हो या फिर कोई अन्य देश का हो। भगवान शिव सदैव अपने भक्तो की रक्षा करने के लिए जरूर आते है। इस कलियुग की कथा के बारे आज आपको बताने जा रहे की मध्यप्रदेश मे स्थित भगवान शिव की एक ऐसे मंदिर की कथा है जिसेक साथ एसी व्यक्ति के साथ जुड़ी हुई है जिसके प्राण भगवान शिव के कारण बची हुहे थे। ये कहानी एक एसे अग्रेंज ऑफिसर की है। जिसने प्रत्यक्ष रूप से भगवान शिव को अपनी रक्षा करके देखा था। 

भगवान शिव और अंग्रेज की कथा।

मध्यप्रदेश के आगारमलवा के अंदर बैजनाथ महादेव का मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। इस कथा उस समय की है जब भारतमे अग्रेजों का शाशन था तब की ये कथा है। कर्नल माटिन एक बार शत्रु से अकेलेमे भीड़ गए थे। तब उसकी जान बचाने के लिए स्वयम  भगवान शिव आये थे। 1979 मे अंग्रेज़ सेना ओर अफघानों के बीच लड़ाई हो रही थी। अंग्रेज़ साइना की ओर से कर्नल माटिन युद्ध की जीमेंद्दारी सोपी गई थी। माटिन अफ़घानिस्तान उस दिन चले गए थे। उस समय जल्दी से संदेश भेजने के लिए कोई साधान नहीं थे। एक पत्रही से समासार  जानने का एक जरिया था। लेकिन युद्ध के दरमियान पत्र भेजना यानि की मौत को डाव देना जैसा था तब। उस समय भी माटिन रोज पत्र लिखते ओर अपनि कुशलता के समासार परिजनो को बताते थे। कौस दिन उसके पत्र नियमित रूप से आते ओर भेजते रहे थे। लेकिन एकदिन पत्र नहीं आया था तब सब लोक घोर भरी उस माटिन की चिंता करने लगे थे ओर कौस दिन तक उसका पत्र ओर माटिन का कहा थे ओर क्या करते थे ओर क्या उनका हाल सही है इन सभी बातों को लेकर सब चिंता करने लगे थे ओर उनके परिजनो भी उनका पत्र देखने के लिए तरस गए थे। जिस तरह उनके मनमे माटिन क बहुत सारी आशंका पैदा होने लगी थी। 

एक दिन की बात है कर्नल की माटिन की पत्नी काही जा रही थी। तब रास्ते मे बैजनाथ महादेव का मंदिर था। उस समय भगवान शिव की आरती का समय था तब उस महादेव की आरती कर रहे थे। वह माटिन की पत्नी मंदिर मे गई ओर पुंजारियों से मंदिर की पूजा के बारेमे पूछने लगी। पूंजारी उस माटिन की पत्नी को कहा ये भगवान शिव है। इनके लिए कुसभी असंभव नहीं है ये  भगवान शिव सबकुस कर सकते है। भक्त का संकट कैसा भी वो ये भगवान शिव हमेशा सदय उसकी मदद करते है। भक्त पर कैसा भी संकट न आये उसे बचाने के लिए भगवान शिव खुद चलकर आते है। ये बात सुनकर माटिन को पत्नी को बहुत आचर्य हुआ ओर उसके मनमे शक्ति का प्रतीक शक्ति बढ्ने लगी। जब माटिन के पत्नी उस पूजारी को कहने लगी मेरे पति युद्धभूमि है। न जाने अफघानिस्तान मे उनके हालत कैसे होंगे। मेरे मनमे कई प्रकार की आशंकाए पैदा होने लगी है। ये कहते हुई है उनकी आंखोमे आँसू आ गए थे। ये सब देखकर उस भिखारिने कहा ओर उसे दिलासे हुहे कहाता है की आप धीरज रखिए ओर भगवान शिव को अपनी पीड़ा के बारेमे आप बताये। वे जरूर आपकी मदद करने के लिए आएंगे। तब आतीं की पत्नी एकदम तरीके उस पुंजारी की बात ध्यान से सुनकर उसने मनमे आशंका लगाकर आपने बात बताई ओर कहने लगी मे महादेव की पूंजा करे ओर आपको जरूर आपकी मदद करेंगे।  श्रीमाती माटिन की पत्नी ने भगवान शिव के दो हाथ जोडकर उसने भगवान भोलेनाथ को आशीर्वाद मांगा ओर पूंजारियों ने उस माटिन के बारेंमे उसकी प्राथना की ओर आशीर्वाद मांगा तथा अनुष्ठान शरू किया। अनुष्ठान समय पर एक डाकिया एक पत्र लेकर आया तभी श्रीमती माटिन के अंदर बहुत सारे प्रकार की उसके मनमे आशंका पैदा होने लगी।  तभी इस पत्र को खोला था तब उन्हे पाई माटिन का पत्र था। 

तब उस माटिन मे पत्रमे लिखा हुआ था की… ” हमारी सेना युद्ध कर रही तब। तभी हालत बहुत खराब थे। पर एक दिन हम सभी पठानों ने घेर लिया था। तभी मौजे महसूस हुआ की आज मेरे जीवन का अंतिम दिन है ओर कोई मेरी मदद करने नहीं आना वाला है। तभी मेरे कई सैनिक बहुत सारे शहीद ओर घायल हो गए थे तभी मेरी मुर्त्यू एकदम मेरे निकट थी। ओर तभी मीने आंखे बंधकर मैंने भगवान को याद किया था ओर इतनेमे कहा से कोई एक व्यक्ति आया था। तभी मैंने देखा की उसका रुपसे तब उसके बड़े बड़े बाल थे, उसने हाथमे कोई बड़ासा नौकदार हथियार धरण किया हुआ था ओर उसे देखती ही पठान भागने लगा। इस तरह मेरे प्राण बच गए थे। तभी मुजे उस व्यक्तिने मुजे दिलासा दिया ओर कहा घभराओ नहीं मे तुम्हारे मदद करने के लिए मे आया हु। ” ये पत्र पढ़कर श्रीमती माटिनकी पत्नी को भगवान शिव पर उनका विश्वास ओर भी प्रबल ओर द्रध हो गया था। कौस डिओनों बाद कर्नल माटिन खुशखुशाल भारत पर वापस आये ओर उन्होने ये घटना बड़ाही विस्तार से बताई। ओर किसी अंग्रेज़ का भगवान शिव पर ऐसा विश्वास लोगीओ के लिए बहुत ही आश्रय का विषय था। बादमे कर्नल ने पूरे शहरमे चंदाई एकठा किया ओर खुद की ओर से राची मिलाकर उसने भगवान शिव का जीनोद्धार करवाया था। ओर आज भी लोग यहा पर भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने आते है। उन अंग्रेज़ दंपति की भगवान शिव का विश्वास पर नमन करते है। ये वर्ष लगभग 1883 की ये बात है। उस जमाने मे उस मंदिर पर लगभग 15000 का खर्चा आया था। मंदिर के पास एक शिलालेख लिखा गया हुआ है। जिसमे इस घटना के बारेमे पूरी तरह से विस्तारण किया गया है। 

तो दोस्तो आजकी इस कलियुग की कथा आपको कैसी लगी उम्मीद करता हु की आप सभी को ये कथा बहुत ही अच्छी लगी होगी।  

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