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जब अपने भक्त के लिए भगवान कृष्ण खुद देने आए थे गवाही | कलियुग की कथाएं भाग – ०६

जब अपने भक्त के लिए भगवान कृष्ण खुद देने आए थे गवाही | कलियुग की कथाएं भाग – ०६


 मित्रो ये घोर कलियुग का समय हे। ईस विपरत कालमे हरिभजन का जरिया हे। जो भी मोक्ष को पाने के लिए जो  हरि का नाम लेंगा हरी उसे बचाने के लिए इस कलियुग मे भगवान का रूप धारण करके हमे बचाने आते हे। इसी बातों लेकर हम आए हे कलियुग की कुस एसी कथा हे जिन्होने धर्मोमे हिन्दू की आस्था को ओरभी ज्यादा प्रबल किया था। तो चलिये दोस्तो हम आपको बताने जा रहे कलियुग की कथा। पुराणों मे ईश्वर से अटूट प्रेम संबधित बहुत सी कथा का उल्लेख मिलता है। कलियुग की कथा मे आज हम लेकर आए ऐसे भक्त की कहानी जिसे देखने के बाद आपको भक्त ओर भगवान का रिश्ता आपको कितना अटूट होता है ये आज उसका पता चल जाएंगा। ये कथा हमारी साक्षी गोपाल नामक मंदिर से जुड़ी हुई कथा है। 

कलियुग की कथा : 

इस कथा के अनुसार एकबार दो ब्राम्ह्ण वृदवान की यात्रा पर निकले थे। ओर उनमसे एक वृद्ध ब्राम्ह्ण था ओर दुसर एक जवान था। ये मार्ग लंबा ओर बहुत कठिन था। मार्ग लंबा ओर कठिन था। जिस वजह से उन दोनो यात्रियो के दौरान बहुत सारे कष्ट भुगतने पड़े थे। उस समय आज के जैसे रेल्वे गड़िया ओर बसो की उपल्ध नहीं थी। यात्रा के दौरान युवा ब्राम्ह्ण ने वृद्ध व्यक्ति बहुत सारी मदद की थी। जिस वजह से वृदवान पुहंचकर उस वृद्ध ब्राम्ह्ण ने कृतुयज्ञा से उस युवान ब्राम्ह्ण को कहा की ….. है युवक तुमने मेरी खूब सेवा की है मई तुम्हारा अत्यंत कृतग्न हु। इस सेवा के बदले मे तुम्हें पुरस्कार देना चाहता हु। पर उस युवा ब्राम्ह्ण ने पुरस्कार लेने से माना कर दिया था। जिसके बादभी उस वृद्ध ब्राम्ह्ण हठीला हो गया था। फिर उस वृद्ध व्यक्तिने अपनी जवान पुत्री का विवाह उस ब्राम्ह्ण युवक से करने का वचन दिया। ब्राम्ह्ण युवक ने उस वृद्ध व्यक्ति को समजाया की एसा नहीं हो सकता। क्यूकी आप बहुत अमीर हो मे तो बहुत गरीब ही ब्राम्ह्ण हु मे। फिर भी वृद्ध ब्राम्ह्ण आओनी हाथ पर ठहरा रहा। ओर फिर कौस दिन बाद वृदावन रहते ही दोनों अपने घर लौट आये। 

तब घर आकार उस वृद्ध व्यक्तिने सारी बात घर आकार कही की उसने अपनी बेटी का विवाह एक ब्राम्ह्ण से नक्की किया था। तब उस वृद्ध ब्राम्ह्ण की पत्नी को ये विवाह मंजूर नहीं था। तब उस वृद्ध ब्राम्ह्ण की पत्नी ने कहा की यदि आप मेरी पुत्री का विवाह उस युवक से कर रहे हो तो मे आत्माहत्या करलुंगी। कौस समय व्यथित होने के बाद ब्राम्ह्ण युवक को कुस चिंता होने लगी। ये वृद्ध ब्राम्ह्ण अपना वचन निभाता है की नहीं। तन ब्राम्ह्ण युवक को ये बात चिंतित करा रही थी तब उस ब्राम्ह्ण युवक को रहा नहीं गया। तब उस ब्राम्ह्ण युवक उस वुर्द्ध  ब्राम्ह्ण को अपना वचन बताया ओर उसे कहा हे वृद्ध ब्राम्ह्ण तुमको अपना वचन याद है न भूलो तो नहीं गए। ओर तब वृद्ध ब्राम्ह्ण तबभी चुप रहा। तो उसे दर था की उससे अपनी बेटी की विवाह उस युवक ब्राम्ह्ण से करवाता है तो उसकी पत्नी जान दे देदेंगी ओर तब वृद्ध पुरुष ने कोई उत्तर नहीं दिया था। तब ब्राम्ह्ण युवक उसे  ब्राम्ह्ण वृद्ध उसका वाचा याद दिलवाता है। तभीभी उस वुर्द्ध ब्राम्ह्ण के बेटे ने उस ब्राम्ह्ण युवक को ये कहकर निकाल दिया की तूम ये बात जूठ बोल रहे ओर तुम मेरे पिता को लूटने के लिए आए हो। फिर तब ब्राम्ह्ण युवक बोला ये सारे वचन तुमारे पिता ने श्रीविग्र के सामने किए थे। तब वृद्ध ब्राम्ह्ण का बेटा उसे भगवान को नहीं मानता था। युवक को कहने लगा था की अगर तुम कहते हो भगवान के साक्षी को मानकर मेरे पिता ने ईश्वर को मानकर मेरे पीटने तुमको वचन दिया है। तो मे मानता हु की ये वचन तुम्हारा सच है तो भगवान ये बात को साक्षी करे की ” मेरे पीटने वचन दिया है की तुम मेऋ बहन के साथ विवाह कर सकते हो। “

तब युवक ने कहा हा मे भगवान श्री कृष्ण को कहूँगा की वे साक्षी के रुपमे आए। क्यूकी उस युवक ब्राम्ह्ण को श्री भगवान कृष्ण पर पूरा विश्वास था। की भगवान श्री कृष्ण उसके लिए वृदवान से जरूर आएंगे। फिर अचानक वृदवान के मंदिर से कुस आवाज आने लगी। ” के मे तुम्हारे साथ कैसे चल सकता हु। मेटो मात्र मूर्ति हु। ” तब उस युवक ब्राम्ह्ण ने कहा की अगर मूर्ति बात कर सकती है तो साथ भी चल सकती है। तब भगवान श्री कृष्ण के समक्ष कुस शरत मुकि ” तुम मौजे किसिभी दिशामे ले जाना मगर तुम पीछे पलटकर तुम नहीं देखेंगे तुम सिर्फ मेरी बांसुरी के ध्वनि से तुम जाना सकते हो किमे तुमरे साथ हु की नहीं ” तब ये बात युवक ब्राम्ह्ण ने ये बात मान ली थी। तब युवक ब्राम्ह्ण वृदवान चल पड़े। जिस नगर मे जाना था तब वहा पोहनसकर तब उसे भगवान श्री कृष्ण की आवाज आना बांध हो गई। तब युवक अपना धीरज पर काबू न रहा तब उस ब्राम्ह्ण युवक ने पीछे मुड़कर देख लिया था। तब मूर्ति वह पर स्थिर खड़ी हुई थी। तब ये मूर्ति आगे नहीं चल पा रही थी। क्यू की उस युवक ब्राम्ह्ण ने पीछे मुड़कर देखा लिया था। तब वह युवक दौड़कर नगर पुहंसा ओर वह पर सब लोगो को एकठा करकर बोलने लगा की देखो भगवान श्री कृष्ण यहा पर आए है। तब सभी लोग बहुत गंभीर ओर स्तंभित हो गए थे। तब सब कहने लगी थी ये इतनी बड़ी मूर्ति इतने बड़ी दूर चल कर कैसे आयी। तब भगवान श्री कृश्ण ने मूर्ति ने सबके सामने ब्राम्ह्ण युवक की गवाई दी। उसके बाद उस ब्राम्ह्ण युवक ओर वृद्ध ब्राम्ह्ण की पुत्री के साथ उसका विवाह सम्पन्न हुआ था। विवाह के बाद उस युवक ब्राम्ह्णने श्रीविग्रह के सन्मान मे उस स्थल पर एक मंदिर बनवा गया था। ओर आज भी लोग इस मंदिर मे साक्षी गोपाल की पूजा करते है। 

तो दोस्तो आपको इस कलियुग की कथा कैसी लगी। इस कथामे कैसे युवक ब्राम्ह्णने अपनी भक्ति श्री कृष्ण के साथ प्रगत की ओर साक्षात भगवान श्री कृष्ण ब्राम्ह्ण युवक की सजी ओर गवाई देने आये। उसे कहते है दोस्तो सच्ची भक्ति। 

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