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हिन्दू देवताओं के सबसे परमाणु बम से भी शक्तिशाली अस्त्र शस्त्र कौन से है ?

 हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र शस्त्र कौन से है ?


हिन्दू धर्म कई पौराणिक कथा वर्णन किया गया है। जिसमे देवतावो ने लोक कल्याण के लिए असुरो, प्रेत्यों ओर दानवो का वध किया गया था। एसी सारी कटाये ज़्यादातर देवतावों ओर दत्यों, दानवो ओर असुरो के बीच यूध्ध से जुड़ी हुई इस वेदो पुराण की कथा है। आज हम लेकर आए है हिन्दू देवताओ के इन युद्धो मे देवतावों के इन शक्तिशाली हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र शस्त्र के बात आपको बताने जा रहे। जिंका इस्तमाल के देवतावों ने शत्रु के लिए किया था। 

हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र शस्त्र  कैसे अर्पण किए अस्त्र ?  

पौराणिक गरन्थो के अनुसार शिव का ये अस्त्र दुनिया का ये सबसे बड़ा सहरक अस्त्र है। एसा माना जाता हे की पुथवि के इन लोको को नष्ट करने की ताकत रखता है। भगवन शिव ने इस अस्त्र से गणेशजीका सर काटा था। साथ ही बर्म्हा जी का पाँच वे सर को भी त्रिशूल के सहायक से उनसे सर ओर धड़ से अलग कर दिया था। इतनाभि नहीं उन्हे अपने त्रिशूल से जालंधर ओर अनोन्ध जैसा ही उसका वध एकदम त्रिशूल से ही किया गया था। त्रिशूल अलोकिक क्रिया से कोई भी वध कर सकता है। एसा कहा जाता हे की त्रिशूल का इस्तमाल करके बाद उसेर कभी रोका या रोकने की या फिर कभी नीयत्रण किया नहीं जा सकता है। जब तक भगवान शिव उसे रोकनी की मंजूर नाहीकरते तबतक शिव का ये त्रिशूल रोक नहीं सकता है। त्रिशूल ये तीनों गुणो से जिसमे है सत , तम ओर रज़ का उल्लेख किया गया है। त्रिशूल भगवान शिव के हाथमे होने का अर्थ है भगवान के अंदर ये तीनों गुणो से ऊपर है। उसका अर्थ है वो एक निर्गुण है। जिसके अलावा भगवान शिव का त्रिशूल पवित्रता एवंम शुभकर्म का प्रतीक माना जाता है। तथा उस त्रिशूल मे मनुष्य के अतीत, भविष्य तथा वर्तमान के कष्टो को दूर करने के लिए उसमे ताकत रखता है। इतना नहीं इसी के साथ हमारी आत्मा, जन्म ओर मुर्त्यु को छोड़कर वो हमे मोक्ष की प्राप्ति द्रारा ओर ईश्वर सानिध्य हमे प्राप्ति होती है। मानव शरीर मे ये तीन तत्व होते है जिसमे है केंद्र, ऊर्जा ओर चैनल, इडा, पिंगला एवंम शूश्मना का प्रतिबिब करता है। 

1.हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र सुदर्शन चक्र है। 

सुदर्शन चक्र एक गोलाकारी युद्ध चक्र है। जिसमे 108 इन चक्र के अंदर दांते बनाए गए हुहे है। धर्म ग्रंथो अनुसार सुदर्शन चक्रो दो अर्थो मे न्बना है। जिसमे सु ओर दर्शन को जोड़कर बनाकर उसको हम दिवि दर्शन भी कह सकते है। ये चक्र गतिशीलता का प्रतिनिधित्व का प्रतीक बताता है। सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का अस्त्र है। जिस भगवान विष्णु ने ये चक्र अपनी तर्जनी उंगली मे धरण किया गया है। सुदर्शन एक एसा चक्र है की उसे छोड़ेने के बाद जिसको लक्ष मे लिया उसे मारकर ही वापस ही अपने स्थान पर वापास आता है। सुदर्शन चक्र के अनुसार एक पौराणिक कथा है जिसमे है भगवान विष्णु ने भगवान शिव की घोर तपस्या के कारण भगवान विष्णु ये चक्र वरदब स्वरूप प्राप्त किया था। एसा माना जाता है की एक बार तीनों लोगो मे देतयो ओर राक्षसों का राज चल रहा था तब देवताओ परशान हो गए थे, तब सब देवी ओर देवताओ भगवान विष्णु के पास गए थे। फिर भगवान विष्णु ने कैलास पर्वत पर भगवान विष्णु की आराधना की थी जब भगवान विष्णु हजारो नमो से भगवान शिव का नाम पर भगवान विष्णु एक नाम पर कमल का चढ़ाकर तब भगवान शंकर भगवान विष्णु की परीक्षा ली जीनामे भगवान विष्णु जो फूल लाये इनमे से एक फूल ले लिया ओर भगवान विष्णु आराधना मे उसको एक फूल के बारे मे पता नहीं चला ओर तब भगवान विष्णु उस फूल को ढुढ़ने लगे परंतु ये फूल नहीं मिला था। जब विष्णु ये फूल नहीं मिला तब भगवान विष्णु ने अपनी एक आँख भगवान शिव को अर्पित कर दी थी। तब भवन विष्णु की भक्ति देखकर भगवान शंकर प्रस्स्न हो गए थे। तब विष्णु भगवान के सामने प्रगत होकर तब भगवान शिव ने उसको एक वरदान मांगने कहा था। तब भगवान विष्णु ने देत्यों को मरने के लिए उसने एक अजेय शस्त्र का वरदान मांगा तब भगवान विष्णु ने उसको सुदर्शन चक्र दिया था। उसके बाद भगवान विष्णु ने देत्यों का उस सुदर्शन चक्र से देत्यों का संहार किया था। इस प्रकार देत्यों से देवी देवताओ से छुटकार मिल गया था। तब भगवान विष्णु के साथ सदाय के लिए जुड़ गया था। 

2.हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र ब्रम्हास्त्र होता है। 

भगवान ब्रम्हा द्रारा निर्मित इस अस्त्र का इस्तमाल महाभारत युद्ध मे किया गया था। इसके अलावा त्रेतायुग मे इंद्रजीत  यानि मेघनाथ द्रारा राम ओर उनकी सेना को मारने के लिए भी इंनका उपयोग किया गया था। एसा कहा जाता है की जब भगवान ब्रम्हा परेशान हो जाते है तब अपने धर्म ओर सती को बनाए रखने के लिए अपने त्रिशूल को नष्ट करने के लिए इस ब्रम्हास्त्र उयपयोग करते है। ये केवल चक्र उनको नष्ट करने के लिए उस व्यक्ति को नष्ट करा देता है वो केवल जिसके लिए उपयोग किया गया हो ओर इस खूनी का नाश कर देता है की जाह उसका इस्तमाल किया गया हो। धर्मो ग्रंथो के अनुसार ब्रम्हास्त्र का आहावन इन मंत्रो के माध्यम से किया जा सकता है ओर इसका उपयोग जीवनभर मे एक ही बार किया जा सकता है। इसका उपयोग विश्वामित्र द्रारा वरिष्ठ सरी राम द्रारा रावण वीरुध ओर अर्जुन द्रारा अश्वथामा के वीरुध ओर आदि के लिए ब्रम्हास्त्र का उपयोग किया गया था।      

3. हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र वज्र है। 

इस अस्त्र का स्वामी देवराज इन्द्र को माना जाता है। वज्र का शाब्दिक अर्थ होता है बिजली होता है। यानि की इस अस्त्र का जब दुश्मनों पर इसका संहार किया जाता है तब जिसको ये अस्त्र लग जाता है तो उनको बिजली की तरह उनको जटके लगते है। ये अस्त्र एक ही जटके मे हजारो दुश्मनों की काबीलियत रखता है। ग्रंथो के अनुसार ये इस घातक अस्त्र का निर्माण ऋषि दधिश्री की अस्थि से हुआ था। एक कथानुसार एकबार वत्रनामक असुर ने देवलोक  पर आक्रमण करकर अपना अधिकार स्थापित कर लिया था। जिस कारण इन्द्र सहित सभी देवलोक का त्याग करना पड़ा था। उसके बाद व्रतसुर के अत्यासुर से नाश करने के लिए सभी देवताओ भगवान विष्णु ने के पास सभी देवी ओर देवताओ उसके पास पुहंस गए। जब ये देवी ओर देवताओ ने उसके उपाय के लिए भगवान वैष्णो को पूछा। तब भगवान विष्णु ने उत्तर दिया उनको एक वरदान प्राप्त है कोई उसका वध कोई धातु या लकड़ी के बने गए हुहे अस्त्र से उनका नाश नहीं करा सकता है। तब भगवान विष्णु ने कहा अकि उसे ऋषि मुनि दधिश्री के अस्थि बने हुहे अस्त्र से ही उनको तुम पराजित कर सकते हो। तब इन्द्र पृथ्वी लोक पर आये तब भगवान इन्द्र ने दधश्री जो ये सारी बात बताई। ये सभी बाते सुनकर दधिश्री ने अपनि आत्मा को वही त्याग करकर छोड़ दिया था। जिसके बाद देवताओ ने उनकी हड़ियों व्रज का निर्माण किया था। तब व्रतसुर पर उयन सभी ने विजय पायी थी।  

4. हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र गदा है। 

गदा हनुमानजी का मुख्य हथियार है। हनुमान को बल श्रेष्ट का देवता माना जाता है। जिसको हिन्दू धर्म से त्रिदेव माने से एक विष्णुभी गदा धरण करते है। गदा एक प्राचीन भारतीय एक अस्त्र है। जिसके हाथमे एक लंबा दंड होता है ओर उसके ऊपर एक भरी सा गोल जैसा जिसको सरीफा का शीर्ष होता है। पौराणिक काल मे युद्धके दरमियान तब दंड पकड़कर उसका दुश्मन पर वार किया जा सकता था। इसका प्रयोग बल सापेक्षित ओर अतीत कठिन माना जाता था। इस परसीं शस्त्र का इस्तमाल सबसे ज्यादा ड्रापल युग मे तब महाभारत के युद्ध के दरमियान की जा सकता था। महाभारत युद्ध मे भीम प्रयोग के सामने इस गदा के कारण बहुत युद्ध हुआ था। जिसमे भीम की जीत हुई थी। इसके आलवा गदा केद्रित प्राण का प्रतिनिध्त्व करता है। जैसे पुथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है ओर जिससे जीवनशक्ति निकलती है ओर फिर उसे सक्रहित करती है उसी प्रकार गदाभी शरीर के चारो ओर जीवन शक्ति एकत्र करने के लिए घूमता है। गदा इक वीरता, शोर्य ओर शक्ति का प्रतीक है।   

5. हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र शिव धनुष है। 

इस धनुष को ब्रम्हान्ड का सबसे बड़ा ओर शक्तिशाली धनुष माना जाता है। इस दिव्य धनुष को पिनाक नाम से जाना जाता है। भगवान शिव के इस दिव्य धनुष की लंबाई 8.5 मीटर थी। भगवान शिव के इस धनुष की ललकार से बादल फट जाते थे ओर प्रवर्त के लिए लड़ते थे। एसा लगता है की जाने कोई भूकंप आ गया हो। इस शिव धनुष से भगवान शिवने त्रिपुरा सुर का नष्ट किया था। कुस ग्रंथो के अनुसार भगवान शिव ने देवी ओर देवताओ की समाप्ती के बाद इस धनुष्य को भगवान इन्द्र को ये धनुष सौप दिया था। कुस ग्रंथो के अनुसार कुस एसा भी माना जाता है की भगवान शिव ने अपने इस दिव्य धनुष को विष्णुजी के अंशअवतार परशुराम को ये प्रहार  मे धनुष के   मे धनुष को दे दिया था। परशु राम ये धनुष राजा जनक को दे दिया था। राजा जनक ने इस अपनी दीकरी सीता के स्वयंवर मे इस धनुष का इस्तमाल किया था। उनहोने घोषणा की थी जिस इस धनुष को उठा सके तो मे उनसे अपनी बेटी सीता को शादी करनी पड़ेंगी तब अंतमे सरी राम ने इस धनुष को उठा लिया था ओर तब सीता से विवाह किया था। 

इस तरह हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली अस्त्र ओर शस्त्र का उपायो किस भगवान ने किया था ओर किस तरह अस्त्र से असुर का नाश किया इन सभी का उल्लेख ओर  हिन्दू देवताओं के सबसे शक्तिशाली को  अस्त्र शस्त्र कोनसे इन सभी का उल्लेख किया गया है। 

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