राधा रानी ने एक छोटी बच्ची बनकर दिए भक्त को दर्शन | कलियुग की कथाएं भाग – 11
नमस्कार दोस्तो हम आपका स्वागत करते है। जानिए दोस्तो कैसे राधा देवी ने एक छोटी बच्ची बनकर दिए भक्त को दर्शन कैसे दिया। मित्रो ये घोर कलियुग का समय है। ईस विपरत कालमे हरिभजन का जरिया हे। जो भी मोक्ष को पाने के लिए जो हरि का नाम लेंगा हरी उसे बचाने के लिए इस कलियुग मे भगवान का रूप धारण करके हमे बचाने आते हे। इसी बातों लेकर हम आए हे कलियुग की कुस एसी कथा हे जिन्होने धर्मोमे हिन्दू की आस्था को ओर भी ज्यादा प्रबल किया था। तो चलिये दोस्तो हम आपको बताने जा रहे एक एसी कलियुग की कथा जिसमे कैसे राधा रानी ने एक छोटी बच्ची बनकर दिए भक्त को दर्शन दिये ओर अंतमे वह दैवी राधा मे समा गई। मित्रो दैवी राधा को भगवान श्री कृष्ण की प्रेयसी की रूप मे जाना ओर पूजा जाता है। लेकिन दैवी राधा कोभी उनका भक्त उनको पूजता है तो उनको दर्शन करने के लिए जरूर जाना पड़ता है ओर उनकी सभी इच्छा पूरी कर देती है।
राधा रानी ने एक छोटी बच्ची बनकर दिए भक्त को दर्शन की कलियुग की कथा।
कुस समय की बात है। किसी गाँव मे रामा नाम की एक भोली भाली महिला उस गाव मे रहा करती थी। उनकी शादी के लगभग पाँच साल के ज्यादा समय हो गया था ओर इतना समय बीत गया बादाभी भी उनको कोई संतान पैदा नहीं हुआ था। रामा ओर उसका पति ओर उनके घरमे सभी रहनेवाले बच्चे पैदा हो उसके लिए बहुत तरस रहे थे। तब एका बार की बात है। रामा के पड़ोस कुस महिलाए राधाष्थमी अवसर पर किशोरी जी यानि की दैवी राधा के दर्शन करने के लिए बरसाने जा रही थी। उन लोगो ने राधकों भी बरसाने के लिए कहा ओर वह चलने के लिए तभी से तैयार हो गई थी। उसके बाद रामा अपने घर जाकर वह मनमे ही मनमे बहुत खुश हुई ओर फुले नहीं समा रही थी रामा। इसलिए इतना खुश हुई की वह पहली बार बरसाने के लिए राधाजी के दर्शन करने जा रहे थी। उसके बाद रामा ने ये बात अपनी सांस को घर जाकर बताई। रामा की सांसने कहा की ये तो अच्छी बात है किशोरी जी की हमारे पर करुणामय है। जा रामा तुम दर्शन करने के लिए जरूर जाना शायद हमारी अबकी बात सुनकर तुम्हारी ये गोद भरदे। उसके बाद रामा घर जाकर खुशी खुशी बरसाने के लिए तैयारी करने लगी। उसी रात को सभी महियालों को बरसनबे जाना था। अचानक वही दिन रामा काम करते समय अचानक उसके पैर मे चोंट लग गई ओर गिर पड़ी। ये बात को सुनकर रामा ने सांस ने कहा की तुम आज नहीं तो अगली बार तुम राधाजी के दर्शन करने जाना। क्यूकी तुम्हें वह पर उसके दर्शन के लिए हमको काफी ज्यादा पैदल चलना पड़ता है इसलिए तुम कैसे चल पाऊँगी? तभी जिद करकर रामा अपनी सांस की बात नहि मानी थी। रामा को लग रहा की बरसाने जाने पर क्या पते किशोरीजी मेरी सचमे मेरी गोद भरदे। उसी बात लेकर अपनी सांस ने बहुत रामा को समजाया की तुम्हें पैर पर चोंट लगी है इसलाइए तुम्हें बरसाना नहीं जाना है इस कारण लाख मना करने के बाद भी रामा अपनी सांस की बात नहीं मानी ओर महिलाओ के साथ बरसाने के लिए राधाजी के दर्शन के लिए तैयार हो गई।
रामा ओर उनकी सहेलिया राधाजि के जयकारी भजन गाते हुहे मथुरा ओर वृदावनमे श्री कृष्ण के दर्शन करते हुहे वह सब बरसाने धाम पुहंस गई। मंदिर की चिढ़िया पर सब लोक राधे राधे का जयकारा लगाते हुहे सब महिलाओ चली जा रहे थी। रामा के पैर मे चोंट लगने के कारण उस चिढ़िया पर चड़ नहीं पा रही थी तो भी रामा उस चिढ़ियों पर धीरे धीरे चढ़ने लगी। उन्होंने सबसे कहा की तुम जाओ सब लोक जाओ मे तुम्हें अटारी के मंदिर के बाहर मेरा तुम सभी मेरा इंतजार करना। तब रामा राधे राधे कहते हुई रामा धीरे धीरे चिढ़िया चढ़ने लगी। तभी उनका पैर मौड़ गया ओर गिरने वाली ही तब उनके पीछे एक सात आंठ वर्ष की बच्ची ने रामा का हाथ पकड़ लिया था ओर वह लड़की बोली मैया तुम संभालकर चलो वरना तुम गिर जाऊंगे। यह सुनकार रामा ने उस लड़की ओर देखा ओर धन्यवाद होकर उसने कहा की बेटी आज तुम नहीं होती तो मे आज गिरही जाती। तब वाहिलड़की ने कहा की नहीं मैया मे तुम्हें नहीं गिरने देती। जब वह बच्ची रामा को वह मैया हुहे बोलाती है तभी रामा को बहुत सकून मिलता है। तब रामा को मैया को यह शब्द सुनकर रामा की आंखो मे आँसू आ गये। फिर रामा वाहा थोड़ी देर के लिए वह उस बच्ची की साथ वह बैठ गई। तब रामा उस बच्ची को पूछा तूम कहा रहती हो ? तब उस लड़की उतर दिया की मैया मे तो यही रहती हु ओर यही मेरा घर है। उसके बाद लड़की बोली मैया तुम मेरे लिए क्या लायी हो! यह बात सुनकर रामा हैरान कर उस लड़की ओर देखने लगी। तब रामा बोली मे तुम्हारे लिए क्या लाउ ? मेतो तुम्हें जानती भी नहीं हु? तुम कौन हो ? ये बात मे जानती भि नहीं हु। तब वह लड़की बोली मैया मे यही रहती हु। सब मुजे प्रेम से लाड़ो बुलाते है। तुमभी मैया मुजे लाड़ो के नाम से तुम मुजे बुलाव मुजे अच्छा लगेगा। ओर मीने तुम्हें गिरने से ही तुमको बचाया है इसलिए तुम मुजे कुस नहीं दोंगी क्या?
तब रामा उस लड़की भोलीभाली बात सुनकर रामा मनमे ही खुश होने लगी थी। फिर रामा बोली अच्छा बेटी तुम्हें क्या चाहिए ? मे तुम्हें कल आकार तुम्हें जरूर दूँगी ओर अगले आंठ डीनो तक मे यहा पर हु। राधाष्थमी के दिन हम राधाजी के दर्शन करने के बाद हम सबलोक फिर घर जाएँगे। तब वह लाडु बोली मैया मुजे चूड़ी, कंगन, मेदी, धागासोली, माथे के टीका, गले का हार, पेरो मे पायल ये सभी मुजे पसंद है ये सब मुजे तुम लेकर दोंगी। तब रामा बोली मेरी लड़ो बेटी यूमको मे सब लाकर दूँगी तुम चिंता क्यो करती हो। उसके बाद रामा बोली लाडु बेटी अब मे चलती हु मेरी सहेलिया मेरा इंतजार अटारी के मंदिर पर मेरा इंतजार कर रही है। ठीक है मैया मे तुम्हें छोड़ आती हु। क्यूकी तुम फिर से नहीं गिर जाना। तब रामा उस लाडु बेटी का हाथ पकड़कर ओर उनकी प्यारी प्यारी बाते सुनते हुहे वह मंदिर की चिढ़िया छड़ने लगी ओर वह पुहंच गई। तब लादू बोली मै मैया अब चलती हु। रामा भी मंदिर कि ओर चली गई। मंदिर मे रामा ने देखा की किशोरोजी ओर ठाकुरजिके उसने दर्शन किए। उनको बहुत ही आनंदमाय दर्शन हुए। अगले दिन रामा ने उस लाड़ो के लिए बहुत सारी चूड़िया लेकर लाड़ो के लिए लायी ओर वह चिढ़िया चड़ रही थी। तभी उसने देखा की लाड़ो मेरा पहले से ही मेरा इंतजार कर रही थी। रामा को देखते ही लड़ो बोली मैया मेरे लिए तुम चूड़ी टीका लायी की नई। रामा ने चूड़िया ओर पायल देदी। तब रामाने कहा मे तुम्हें सब लाकर दूँगी पर क्या करू मे अगले आंठ दिन तक मे यहा पर हु इसलिए तुम्हें रोजाना आंठ दिन तक मे तुम्हें कुस न कुस लेकर दूँगी इसलिए की तुम चली गई तो। यह सुनकर लड़ो मुसकारने लगी। ओर चूड़ी ओर पायल लेकर वह से भाग गई।
एक दिन की बात है जब रामा लाड़ो के साथ मिली तब लाड़ो के साथ एक लड़का भी था। देखने वह नेननक्ष, रचिला चावला ओर गौरा ओर घुँघराले बाल इतना सुंदर की रामा की उस लड़के पर अपनी नजर हट ही नहीं रही थी। तब रामा ने कहा की ये कौन है ? तब लाड़ो बोली मैया ये मेरा सखा है हम साथमे ही रहते है। मैया तुम कल इसके लिए भी तुम लेकर आना। अगले दिन रामा उस लड़के लिए सुंदर सी धोती ओर कपड़े ओर सुंदर सा मोरपंख लेकर उसके लिए लेकर गई। उसने देखा की दोनों बच्चे वह मेरा इंतजार कर रहे चिड़िया पर। तब रामने उस बच्चो को बहुत प्यार दिया ओर बहुत सारी मीठी बाते की। फिर रामा ने जो लायी चिंजे धोतियावाले कपड़े ओर मोरपंख उस बच्चो को दिया। उसके बाद रामा ने कहा देख लाड़ो माने तुम्हें ओर तेरे सखा को सब लेकर दिया ओर तभी तुम दोनोंने पहनेते हुहे तुमने मुजे दिखाया ही नहीं। तभी मे भी देखू की तुम लोग इस वस्त्र मे कैसे लगते हो ओर तेरा नाम सही या नहीं। तब लाड़ो बोली कल राधाष्टमी है न कल तुम्हें मे सब पहन के मे तुम्हें दिखाऊँगी। ये कहकर दोनों बच्चे वाहा से चले गए। उसके बाद मंदिर के दर्शन करकर वह से रामाभी चली गई।
अगले दिन राधाष्टमी थी तब वहा पर कई लांखों की संख्या वहा आई हुही थी। वह सब जगह पर राधे राधे के जयकारे नारे सबलोक बोल रहे थे। तब रामा भी वह पुहसी जहा लाडु वहा रोज मिलती थी। पर आज वहा पर लाडु नहीं थी। रमने सोसा की आज याहा पर बहुत भीड़ है ओर उत्सव भी है इस कारण वहा पर आज नहीं आई होंगी। तब रामा मंदिर मे दर्शन करने के लिए पोहंसी। तभी भीड़ के कारण रामा को दर्शन करने नहीं मिल पा रही थी। तब रामा बहुत भीड़ के कारण भी वह थोड़ी थोड़ी जगह डेकार वह किशोरी जी के दर्शन करने के लिए पुहंस गई। वहा जाकर वह कुस तक वह पत्थर हो गई थी। वहा उसने देखा की किशोरीजीने वही समान पहन हुआ की जो मीने यह लाड़ो को दिया था। तब वह उसके शरीर से पूरे पसीना निकाल गया था। उसे तब कुसभी समाज नहीं आ रहा था तब बड़ी मुश्किल से पूंजारी जी से कहा आज वस्त्रो की सेवा किसने की है। आज वस्त्रो जी की सेवा खुद लाड़ली जी ने की है। आज हमने मंदिर खोला था तब ये सारा समान वही पड़ा हुआ था। हमें लाड़ली जी कि मर्जी मानकर हमने इसको पहना दिया था। यह बात सुनकर रामा पगलसी हो गई। उसे समाज नहीं आ रहा था की मे रोज उस लड़ो ओर उस लड़के रोज बात करती थी वो साक्षात किशोरीजी ओर ठाकुरजी थे। तब वहा पागलो की तरह भागकर वह चिड़ियो की तरफ गई जहा उसे रोज मिलती थी ओर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी लाड़ो लाड़ो ऐसे चिल्लाने ने लगी। पर आज क्या करे उस लाड़ो को आज लाखो लोगो को दर्शन देने थे। तब उनकी सहेलिया कहने लगी तुम किसे बात करती हो रोज तब रामाने काह मे रोज बात करती थी लाड़ो से जो आज हमें दर्शन किया उस लाड़ो से बात करती थी। तब रामा ने कहा की जबतक लाड़ो नहीं मिलाङी तबकत मे घर नहीं आ रही। तब सभी औरते वहा घर चले गई थी।
ये बात जब रामा के घरवालो को पता चला की तब वहा रामा को लेने के लिए उनके सांस ओर पति दोनों उनको घर लेने के आए। पर रामा उनके साथभी नहीं गई। रामा जभी उस चिड़ियो को देखकर लाड़ो के यादमे वह आँसू बहाती है, ओर वहा जाकर लड़ो लाड़ो इस ततरह चिल्लाती थी। तभी रामा को इस बात को लेकर तीस साल गुजर गई। तब रामा बहुत कमजोर हो सुकी थी। पर एक दिन हुआ ये की एक लड़की उसके सामने आकार उस रामा का हाथ पकड़कर वह अटारीजी के मंदिर पर वह दर्शन के लिए ले गई। ओर तभी वह बच्ची बोली मैया ये रही तुम्हारी लाड़ो तभी रामा को बुलाते हुहे वही बाहे खोलकर वही लाड़ो बुला रही थी। तब रामा बहुत बावरी हो गयी ओर तभी आखरी हिचकी आने पर वह जमीन पर गिर पड़ी। एसा लगी की किशोरीजीने रामा को नहीं बल्कि उसकी आत्मा को गले लगा लीया हो।
दोस्तो हम आपसे उम्मीद करते है की ये आज की कथा आपको अच्छी ही लगी होंगी। तो दोस्तो नमस्कार हम ऐसी कथा के साथ हम लेकर आएंगे दूसरी कथा।
