औरत की ये 4 भूख कभी नहीं मिटती !
मित्रो हम आपका स्वागत करते है। मित्रो जीवन संगीना बिना हमारा जीवन अधूरा ओर निरथक है। संगिनी कामना कौन नहीं करता है। लेकिन सवाल ये की संगिनी कैसी होनी चाहिए। ओर किसे जीवनसाथी बनया जाये। केवल रूपसे ही लावण्य है होता है इनसे हमे विवाह करना चाइए। मित्रो स्त्रियो के बारेमे अक्सर कहा जाता है की चाहे स्त्री कितनी भी सत्यप्रिय न हो उनके अंदर अनघने रहस्य दबे रहते है। आचार्य चाणक्यने भी चाणक्य नीति मे एसी स्त्रियो के बारे एसी चार बातों के बताया है की जिनहे अपने पति तक को भी ये चार बात नहीं बताती है। जो ये चार चिंजे एसी है की जो महिलाओमे पुरुषो की अपेक्षा अधिक पायी जाती है। तो भी अगर आप जानना चाहते है की इन चार बातों का रहस्य के बारेमे तो आप बने रहे आज की एस चाणक्य नीति मे।
एक महिला के अंदर कौन सी चार चीजें कभी नहीं मिटती ?
मित्रो वास्तवमे आचर्य चाणक्य ने वास्तवमे अपनी नीतिमे की स्त्रियोकी की तुलना पुरुषो के सरह करते हुई उनके भावनाओ के बारेमे बताया गया है। जो स्त्रीओमे पुरुषो की अपेक्षा अधिक होती है। ये मीट्रिओ अर्थात है की प्रेम, तप, त्याग एसी बहुत सारी स्त्री मे भावनाए होती है। जिनके अधिक स्त्रियोसे तुलाना की जाए तो वही लक्षण आपको कभी नहीं देखते है। परंतु मित्रा आचर्य चाणक्य के अनुसार लिखे गए जिन भावनाओ के बारे मे आज हम आपको बात करने जा रहे की उयंसे ये ज्यादा काफी अलग होता है। जिसके बारे मे नीचे गए हुहे है।
1.स्त्री के अंदर शर्म ओर लज्जा होना।
मित्रो वैसेभी आपने आमबोल चाल की भाषामे आपने ये सुना ही होंगा की शर्म एक स्त्रिका एक गहना होता है। जिसका वरणित कथा है चाणक्य वरणित किया गया है। एक स्त्री के अंदर एक शरम ओर लज्जा जो होती है पुरुषो के अंदर जो चार गणी ज्यादा होती है। यही कारण होता है की छाए कोईभी स्त्री हो वो एक कृती करने से पहले कई बार सोचसी है एक स्त्री। क्या एसका असर अपने परिवार वालो पर एक अच्छा असर पड़ेंगा यतों बुरा असर पड़ेंगा ये बात हजार बार स्त्री सोचती रहती है। एक स्त्री के अंदर काफी ज्यादा आपने देखा की आपने एक स्त्री को अकेली जा रही स्त्री को सुमशान रास्ते पर दरवानी जैसी चाल रही होती है। क्यूकी उसका कारण है की उसके पास शर्म ओर अपनी इज्जत का सवाल होता है। यदि चाणक्य के नुसार ये बात भी कहा जाती है की स्त्रीको एक पुरुष प्रतेय ज्यादा लगवा होता है। यदि एक स्त्री अपनी ओर अपने परिवार की इज्जत का काफी ज्यादा ध्यान रखती है। यदि कोई स्त्री अपनी शर्म खोकर एक दूसरे पुरुष के साथ वो एक संबध बांध लेती है तो एक स्त्री कई बार सोसती है की ये काम सही कर रहा हु की गलत ये बात हजार बार सोसती है स्त्री।
2. एक स्त्री के अंदर भूख होती है।
आचर्य चाणक्य कहते है की हर स्त्री की भूख अर्थात आहार होता है। जो स्त्री की भूख पुरुषो के साथ तुलना की जाये तो उसमे दोगुना होती है। ये बात आपको सुननेमे आप्क असभाविक आपको लगती है परंतु ये बात सत्य है। वर्तमान समय की बात हम करे तो आपको एसी स्त्री आपको कम दिखने मिलेंगी की जो ज़्यादातर भोजान करती होती है। लेकिन उनमे उसका कोई दोष नहीं है। आज की जीवनशैली ओर आजका खानपान ही एसा है की जिसके अनुसार चलती स्त्रीया खुद को स्वस्थ रखने के लिए भोजन के रूपमे लिया गया आहार कुस ही आहार का गुची करती है। आपको लगता है कीक स्त्री भोजान बहौत ही खाती है पर ये बात आपको गलत होती है क्यू हर स्त्री को भूख बहुत ही ज्यादा लगती है ओर स्त्री को वजन बहुत ही जल्द बढ़ जाता है। यदि एक स्त्री भोजन कम लेती है तो उसका कारण है उसकी जीवनशैली पर निर्धारित करता है। यदि भूख के कारण एक स्त्री को एकदिन का खाना नई दिया ज्जाता है तो चाणक्य के अनुसार ये आपका दुर्भाग्य ओर आपके कर्ममे लिखा गया हुआ है।
3.एक स्त्री के अंदर काम वासना होती है।
आचर्य चाणक्य कहते है की एक प्रत्येक स्त्री अंदर काम वासना भी पुरुषो से काही अधिकमात्रा मे होती है। लेकिन असीम सहनशक्ति ओर साहस के कारण स्त्रीया के अंदर की इच्छा कभी कभी उजागर नहीं होने देती है। बल्कि अपने धर्म ओर अपने संस्कारोकी अनुयाही रहकर वो अपने परिवार को संभालती है। ओर अप[ने परियावार का ख्याल रखती है। हमरे धार्मिक शास्त्र मे इस तथ्य का समर्थन का एक वैज्ञान करता है। जिससे अनुसार एक पुरुष की इच्छा अनुसार किया जाए तो स्त्री के अंदर एक कामवासना ज्यादा ही होती है। परंतु साथ ही उसमे नियत्रन रखने की क्षमता भी पुरुष के ज्यादा एक स्त्री के अंदर ज्यादा होती है। जब स्त्री को कामवासना जागती है तब स्त्री पाने आप को काबू रखने की बहुत काबू करताई है। जब हम पुरुषो के अंदर देखा जाये तो पुरुष एक स्त्री कई बार कामवासना का प्रति देता है परंतु एक स्त्री उनपर बहुत ही काबू रखती है।
4.एक स्त्री अंदर साहस करनी की क्षमता होती है।
यदि आपको ये बात मालूम नहीं है बल्कि समाजमे अकसर देखा जाये तो जभी समाजमे साहस ओर बल का जिक्र होता है तो तभी सीधा पुरुषो के या फी उयांके पुरुषार्थ के जुड़े के साथ एक पुरुष मे देखा जाता है। तो वही स्त्रीकों आप कोमल समजकर आप उन्हे सुरक्शित रखने की बात काही जाती है। मित्रो एक ये बात आपको सामाजिक धारणा होती है। जब चाणक्य की नीति मे कहा जाता है की आप ये चौथी बात सुनकर आपकी अंदर का नजरिया बदल सकता है। जब पुरुषो की अपेक्षा एक स्त्री अंदर 6 गुना साहस करनी शक्ति रखती है। स्त्री एक पुरुष साहसी देखा जाये तो स्त्री के नादार साहस करने की शक्ति बहुत ज्यादा होती है। एक स्त्री अपने दिमाग मे कूस थान लेती है तब वो स्त्री पीछे कभीभी पीछे नहीं हटती ओर सफलता प्राप्त हे जंप लेती है। यही कारण है की पुराणोभी स्त्री को एक शक्ति का स्वरूप माना गया है।
हम आपसे उम्मीद करते है की इस चाणक्य की नीति के अनुसार एक स्त्री के ये चार बातों का राज छुपा होता है। जो ये चार बाते किसी को स्त्री नहीं बताती है। आपको इस स्त्रियो को समजने ने के लिए आपके अंदर ओर उनसे जुड़ी हुई सोच को बदलने के लिए आप सहायक साबित होंगे आप।
