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चाणक्य के अनुसार बुरे वक्त में कभी ना भूलें ये 3 बातें।

 चाणक्य के अनुसार बुरे वक्त में कभी ना भूलें ये 3 बातें।


मित्रो हम आपका स्वागत करते हे। मित्रो घड़ी की टिक टिक करने वाली सुई हमे समय दिखाती हे। वो सामी दिखती हे जो हमारा समय कभी अच्छा जाता हे ओर कभी दुख मे हमारा समय जाता है ओर कभी तो कभी तो हमारा समाय बुरा बीआईटी जाता है। मित्रो हम घड़ी की सुई की भागी मे नहीं होता है। हमारी जिंदगी के पहले ही ये घड़ी निरंतर ही चलती रहती है। जब हमारा वक्त कभी अच्छा होंगा ओर कब हमारा समय बुरा होंगा ये समय बताता है। लेकिन खराब समय पर हमे क्या करना चाहिए ओर कैसे ये जरूर आपके हाथमे होना चाहिए। तो मित्रो हमे कैसे हमारा समय खराब हो तो हमे क्या करना चाहिए ओर एसा क्या करते हे तो आप फिरसे आप सुधार सकते हो। आखिर वो खराब समय मे हमे कौन कौन सी बाते हे आपको कभी नहीं भुलनी चाहिए। तो जानिए हमे क्या करना चहाइ। 

बुरे वक्त में कौनसी बातें नहीं भुलनी चाहिए ?

मित्रो आपनेभी सुना होंगा की बुरे समयमे अपनेभी साथ छोड़ देते है। प परंतु समय अपनो की ओर अपने समय पर करावाह देता है। इसलिए आपकी जिंदगी मे कभी बीरा वक्त आए जब आपका समय कितनाभि बुरा समय आये तो आपको कुस बाटो आपको नहीं भूलना चहाइ। चाणक्य  एक श्रेष्ट शिक्षक होने के साथ साथ एक श्रेष्ट विधवान भी थे। उन्हे बस अर्थशास्त्र का भी ज्ञान नहीं था बल्कि उन्हे काही सारे पुस्तके का ज्ञान था जो ये बात नहीं जानते। चांकी ने मनुष्यो को प्रभावित करने वाले सभी विषय का यूनामे बहुत गहरा ओर उड़ानप्रूवक बहुत सारा ज्ञान था। चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति के जीवनमे बुरा समय आता है। उनके मुताबिक उसकी पहसान बुरे वक्त पर आपनोकी पहसान करवा देता है। जिस प्रकार रात होती है ओर रात के बाद दिन होता है। ऊसी प्रकार मनुष्य के जीवन मे पहले सुख आता ये दुख ओर बादमे मनुष्य के जीवनमे सुख आता हे एसा मनुष्य का जीवन चक्र होता है। इस कार्न मनुष्य के जीवनमे सुख ओर दुख का अनाजना रहता है। मित्रो हम जीवनमे क्या करना चहाइए ओर क्या करना नहीं चाहिए ये सब सिखाने वाले धर्मग्रंथो या फिर आपको महान चाणक्य आश्रय इनकी सभी बाते हमे जीवनमे सीखने ओर कैसा बुरा समय आने पर हमे क्या ओर क्या नहीं करना चाइए ये सब हमे सिखाते है। संकट समयमे हमे कैसा रहना ओर कैसा नहीं रहना चहाइए ये सब बाते आचार्य चाणक्य हमे सिखाता है। मित्रो आपके जीवनमे भी कभी आपका बुरा समय चल रहा हो तो कुस एसी बाते ये जिनका हमे विशेष ध्यान देना चाइए। जीनेम से पहला हे आत्मसयोग। 

1. आत्मसयंम रखना चाहिए। 

कभीकभी खराब समयमे आत्मसयंम होना चाइए जिसमे अपोकों लैना है। सुखी समय आप जिस तरह आप अपने खुद पर नियंत्रण रखते हे ठीक वैसे ही तरह आपके जीवनमे आत्मसयंम रखना चाहिए ओर अपनी भावनाओ पे आप काबू रखना सीखे। कभी कभी आवेश मे आकार आप कोई एसा गलत कदम ना उठाई जो जीवन से अलग एकदम गलत हो। यदि आप ज्यादा ही उतावले हो रहे हे तो आपको एयसा नहीं करना करना आपको धीरज रकहनी चहाइए ओर आपको सही समय का आपको इंतजार रखना चाहिए। जैसे ही आप मन से आप आत्मसयंम का आप उससे दूर भागते हे तो आपको कुस एसे गलत कदम उठानेमे आपको खिचते रहता हे। यदि आपके जीवनमे कभ कभी आप जीवन के आप धेर्य रखना नहि जानते हे तो आपको आत्मसयंम को ठेस पहोन्स जाती है। यदि आपको लगता हे मेरा बुरा ही समय आने वाले तो आप ये सोच मे नहीं रहना क्यूकी हर बुरे के पीछे हमे सुखद का आनंद का राज छिपा हुआ होता है। 

2. धेर्यवान बने। 

यदि आपके जीवनमे धेर्यवान नहीं रकहते तो आपके सामने हर तरह की मुसीबत ओर कठिनाइयो का आपको सामना करना पड़ता है ओर आपके जीवनमे आप कभी नहीं खुश होंगे। अकसर सब लोक क्या करते हे की तब बुरे समय पर सब धेर्यवान को खो देते हे ओर उसको दुख का सामना करना पड़ता है। तब वही लोग अपने मनमे सोचते रहते हे की कब मेरा समय अच्छा आएंगा तब अच्छा नहीं आता हे तब वो लोग अपने को कोसते रहते है। मित्रो आपको ये मानकर चलना चहाइए की सुख ओर दुख ये जीवना के दो पहलिया है एसा आपको मानना चाहिए। ये बात सही हे की यदि आप दुख मे गुजर रहे तो तो आपका समय एकदिन जरूर आता हे की जो आपको  सुख की दुनिया मे आपको लेकर जाएंगा। साथी दोस्तो ये से समय पर अपनों की पहसान सब बुरे वक्त मे ही सब बताते है। यदि आप ये मानकर आप चल हे की ख़ुन बने हुहे रिश्ते, स्कूल के बने हुहे मित्र ओर साथ आपके साथ काम करने वाले वो लोग जिनसे आपकी विचारधारा मिलिती हो तो आपको लगता हे की ये आपके साथ ही हे पर दोस्तो ये सब गलत बात है। उसमे से सभी आपके साथी नहीं हो सकते है परंतु आपको यूनामे से आपको कुस लोगो को ही आपको सुनना होंगा। जो संकट समय भी ओर बुरे वक्त मे भी आपका साथ दे सकता हो उससे आपके साथ रखना चाहिए। आप नहीं जानते है की आफ्नो के बिना नहीं सुख का मोह रखते ओर नहीं आप दुख का मोह रख पाते हो। यदि आप अपनी बाते अपने घरवालो को आप बताते हे तो आपका दुख बहुत ही हलवा हो जाता है। यदि आप सबको खुशी डोंगे तो खुशी दोघुनिओ हो जाएंगी। 

मित्रो आपने अकसर देखा होंगा की खराब समय आने पर मनुष्य भगवान खोजने ओर कोसने लगता है। उसे लगता है की भगवान इस दुनिया मे है नहीं लेकिन दोस्तो आपको ये जानना भी जरूरी होता है की ये सब ऊपर से भगवान  देख रहा है। यदि भगवान आपके जीवनमे खराब समय लेकर आया है तो उसके पीछे कोइ न कोई कारण जरूर होंगा। इसलिए हमेशा मनुष्य को भगवान की आराधना करनी चाहिए। यदि आपके मनमे ये बात को आप जरूर गांठ बांध लो की जब दिन के बात रात का आना जरूरी होता है वैसे ही दुख ओर खराब के समय बाद अच्छा यतों सुखद समय लाता है। इसलिए मित्रो आप ईश्वर से आप भीख नहीं बल्कि आप उसका हल मांगना जरूरी होता है। इसके अलावा चाणक्य नीति ये भीकहती है की जिसे शख्स मे निर्णय लेने की लेवल की क्षमता होती है उसका खराब समय वकही जल्दी निकाल जाता है। चाणक्य नीति ये भी कहती है की जिसके पास निर्णय लेनी की क्षमता नहीं होती हे। एक  विचार वाली मनुष्य एक निर्णय सोच समजकर ही लेता है। 

3. जल्दबाज़ी या आवेश मे नहीं लेता निर्णय। 

काही बार मनुष्यके सही निर्णय लेने से उसकी परिस्थिति को पलटकर रख देता है। क्यूकी वो मनुष्य अपना निर्णय सोच समजकर ही देता है इसलिए उसके जीवनमे बदलाव आता है। अंतमे मे यही कहना चाहता हु की मनुष्य को बुरे वक्त मे सदाय तैयार ही होना चाहिए। आप नहीं जानते हे की बुरा समय ही मनुष्य को मजबूत बनाता है। जिस प्रकार सोना अग्नि मे जलकर कुन्दन बनाता है उसाइ प्रकार मनुष्य दुख के समय या बुरे समय ही मनुष्य को मजूबूत बनाता है। इसलिए दोस्तो आपको बुरे समय आने पर मनुष्य को नहीं गभराना नहीं चाहिए ओर नहीं भगबा चाइए। तभी आप जीवन मे बुरे समय का आप सामना करते हे तभी आप सोने की तरह आपके जीवनमे  चमक आमे लगती है। 

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