किन्नरों का अंतिम संस्कार रात में ही क्यों किया जाता है।
नमस्कार मित्रो हम आपका स्वागत करते है। मित्रो मनुष्य की तुरु एक स्त्री ओर एक पूरुष वर्णन आप सभी तो करते ही रहते है परंतु कुदरत का दिया मनुष्य का एक दूसरा रूप है। जिसके नाम से ही मात्र वह आधे लोग उससे जुड़ा ही रहना चाहते है। जी हा मित्रो हम यहा पर बात करने वाले किन्नरों की समाज का एक एसा समुदाय जिसमे उसकी दुआ ओर बददुआ दोनों को ही अत्यधिक ही फलंक माना जाता है। क्या आप जानते है की इस समुदाय से जुड़े कई एसे रहस्य है जिनके बारे उसका पता लोगो को नहीं होता है। ओर इनहि रहस्यो मे से एक रहस्य जिसमे किन्नरों का अंतिम संस्कार से जुड़ा हुआ है। मित्रो क्या आपको ज्ञान है की किन्नरों का अंतिम संस्कार एक बहुत ही तरीके से रात्रि के माध्यम से किया जाता है। यदि नहीं जानते है की एसा क्यू करते है ? इसलिए हम इस गरुड पुराण की बाते बताएँगे। तो आइये दोस्तो जानते है की गरुड पुराण मे वर्णित इसके पीछे का छिपा हुआ असली रहस्य क्या है।
किन्नरों का अंतिम संस्कार से जुड़ी हुई कई बाते जो आपको मालूम नहीं है।
मित्रो युतों की किन्नरों को पौराणिक ग्रंथ मे यक्ष ओर गरवों के समान ही उसका स्थान दिया जाता है। परंतु इसक अस्तवित के समान ही इनकी अंत्म संस्कार की प्रक्रिया बहुत ही अदभूत होती है, जिसका वर्णन इस गरुड पुराण मे किया गया है। इसमे वर्णित एक कतर्हा के अनुसार किन्नरों का अंतिम संस्कार की अंतिम विधि का बहुत गोपिनियता से किया जाता है। गरुड पुराण के अनुसार एसा माना जाता है की किन्नरों के पास एक एसी अदभूत शक्ति होती है जिसका पता हम सभी को नहीं होता है। जिसका फलस्वरूप उस मरने से पहले हिपता चल जाता है की उनकी मुर्त्यु पहले से ही होने वाली है। एसा होने के कारण किन्नरों कही पर आना जाना बंध ही कर देते है। यहा तक वह अन्न का त्याग करके वह पानी पीते है। ओर इस अंतराल मे वह अपने ओर दूसरे किन्नर के लिए वह भगवान से यही प्राथना करते है की उनका अगला जन्म वह किन्नर के रूप मे जन्म नहीं होता है। एसा करने से पीछे किन्नर समुदाय की एक प्राचीलित मान्यता है की जिसके अनुसार मरते हुए किन्नर के शब्द बहुत ही प्रभावित शाली होते है। इसलिए बहुत से लोग मरते हुहे कई किन्नर का आशीर्वाद लेने आते है। इसके चलते ही किन्नरो का द्वारा ये प्रयास किया जाता है की उनके समुदाय के रूप किसी अंध व्यक्ति को मरणासनत मृत किन्नर की उसको सूचना ना मिले। गरुड पुराण मे प्रतेयक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के अनुसार उसाका अलग लग वर्णन किया गया है। जिसमे बच्चो ओर महिलाओ के अंतिम संस्कार को लेकर उसमे बिनकर्मों का उल्लेख किया गया है। इसी जुड़ी हुई अधिक जानकारी के लिए आप आगे ही बढ़ते रहे ओर गरुड पुराण की कथा आगे ही बढ़ते रहे।
किन्नरों के अंतिम के संस्कार के कुस नियम के बार मे उसका उल्लेख किया गया है। गरुड पुराण के अनुसार किन्नरो की शत को जलाया नहीं जाता है बल्कि उसको दफनाया जाता है। हिन्दू धर्म मे प्रतयक के अंतिम संस्कार मे बारेमे ओर इसके विधि के बारेमे बताया गया है। जब ये किन्नरों के लिए उनकी अंतिम संस्कार मे उसे दफनाया का बहुत ही प्रणयदान है। किन्नर समाज मे किसिभी मुर्त्यु होती है तो सबसे पहले उनके आत्मा को आजाद करने की प्रक्रिया की जाती है। इसके लिए उस मृत शरीर को सफ़ेद कपड़े मे लिपट दिया जाता है। साथ ही दोस्तो ये भी ख्याल रखा गया है की शत पर कुस भी बंधा हुआ ना हो। एसा इसलिए कहा जाता है की उसकी आत्मा को वह आजाद कर सके। इतना नहीं बल्कि उस किन्नर की आत्मा को सब किन्नरों मिलकर उस आत्मा को बहुत तरह की गालिया देते है ओर उसे जूते चंपलों से मारते है। क्यूकी एसी मान्यता है की एसा करने से उस किन्नर के शत के सभी उसके जन ओर उसके सबंध वाले ओर इसके पाप कोईभि रह जाता है तो वो भी बिलकुल ही नष्ट हो जाता है ओर अगले जन्म मे संपूर्ण पुरुष का जन्म की आशा करते है। इसी कड़ी मे उस संसार के सभी जुड़ी किन्नर की ओर भी मान्यता है की जो की वह आम लोगो से वह बिलकुल ही अलग होती है। जब मृत किन्नर की अंतिम शत को किसी साधारण मनुष्य वह कंधे नहीं होते है बल्कि किन्नरों की शत को खड़ा लेने का बहुत ही प्रणयता दिखाय देती है जो ये बात गरुड पुराण मे ही वर्णित किया गया है।
किन्नरों का अंतिम संस्कार मे क्या किया जाता है।
गरुड पुराण अनुसार एक एसी भी मान्यता है की जो की इस मान्यता सभी मान्यता से वह अलग ही मान्यता है। गरुड पुराण मे उस किन्नरों की आत्मा से जुड़ी हुई ओर कई शत से जुड़ी हुई बातों का उल्लेख किया गया है। जिसके अनुसार अगर कोई गैर किन्नर किसी किन्नर की शतयात्रा या फिर मृत किन्नर को देखे उसका अगला जन्म किन्नर की तरह होता है। इसलिए दोस्तो किन्नरों के समुदाय द्वारा एसा प्रयत्न किया जाता है ई उस दिवंगत की नर को कोई आम जन नहीं देख पाये। इसलिए उसकी मृतु होने पर उनके पहले अधिकारी द्वारा पहले से ही सूचित किया जाता है। की वह उस किन्नर को शत को दफनाया जाये। किन्नर की किसिभी मुर्त्यु होने पर कोई गाना या डांस ओर खुशिया बनाने की मान्यता है ओर एसा किया जाता है की क्यूकी गरुड पुराण अनुसार उस किन्नर की आत्मा को इस सुष्टि से उसे मुक्ति मिल जाती है। जिसका धन्यवाद करने के लिए संपूर्ण किन्नर उस शत के चारो ओर खड़े होकर वह उस शत के मुक्ति के लिए वह अपने आराध्य देव इरावत देव का वह नमन करते है ओर प्रथना करते है की उस मृत किन्नर को दूसरे जन्म वज उसको किन्नर का जन्म नहीं बल्कि उसको संपूर्ण पुरुष का जन्म मिले एसी प्राथना करते है। इसके अलावा उसको कई पुण्यदान भी किया जाता है। कयुकी उस पुण्य के कारण उस किन्नर को दोबारा उसे किन्नर का जन्म नहीं मिले उसकी आशा करते है। मित्रो ये भी खा जाता है की किन्नर समुदाय द्वारा उस किन्नर को शत को दफनाना ने के बाद उसे एक सप्ताह के लिए सभी किन्नरों को एक व्रत करना पड़ता है। इसल्ये उस किन्नर की शत के लिए सभी किन्नरों उस शत के लिए प्राथना करते है की जिन सौभाग्य से वो इस जन्म मे वशीन्त रह गया था ओर अगले जन्म वह पूर्ण रूप से पुरुष का अवतार लेकार आए इसी प्राथना करते है।
तो मित्रो इस गरुड पुराण मे इस वर्णित इस किन्नरों का अंतिम संस्कार रात में ही क्यों होता है ? इसके बारे मे आप्क जानना बहुत ही जरूरी होता है। तो मित्रो आज की इस गरुड पुराण की बात आप्क कैसे लगी। उम्मीद करता हु की आपको अच्छी ही लगी। तो मित्रो हम आपसे विदाय लेते है। नमस्कार दोस्तो।
