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चाणक्य की नीति के अनुसार आप किसी भी शत्रु को परास्त कर सकते हैं।

 चाणक्य की नीति के अनुसार आप किसी भी शत्रु को परास्त कर सकते हैं।


मित्रो हम आपका स्वागत करते है। मित्रो हमारे जीवनमे सुख ओर दुख तो आते ही रहता है। लेकिन वह कष्ट तब बढ़ जाते है की जब हमारे सामने कई शत्रु आकार खड़े हो जाते है ओर हमारे किए गए कार्य पर वही पानी फिर देते है। वैसे तो मित्रो हम कमजोर शत्रु को पराजित करना बहुत ही आसना होता है। लेकिन दोस्तो ये सवाल किया जाये तो अपने कई गुना शत्रु शक्तिशाली हो हम उनको कैसे हराया जाये। तो मित्रो हम आपको बताने जा रहे की आप्क कौए ओर साप की हम एसी कथा बताने जा रहे की जिसे आपने सुन लिया है तो अपने जीवनेमे किसी भी प्रकार का शत्रु आ जाये तो आप अपने जीवनमे कभी नहीं हार पाउंगे। 

किस तरह शत्रु को परास्त कौआ ओर साप की कथा। 

चाणक्य के अनुसार ये बात कई वर्षो तक है की एक घने जंगलमे जिसमे कौए का जोड़ा रहता था। वो दोनों कौए दिनभर जंगल मे भोजन की तलाश काटे है ओर श्याम वापस अपने घोसले मे आ जाता है। एसेही दोनों अपना  जीवन अपना व्यथित करते करते उसमे एक मांदा कौआ गर्भवती बन गया था। तब वैसे मे उस दोनोंने सोचा की हम इस अंडो को इक अच्छी जगह पर किया जाये। एसे मे उस दोनों कौआ आपने नए आसरो का तलाश मे पूरे जंगल मे करते रहे। काफी समय के बाद उन दोनों कौओ को एक जंगल के बिछ बर्गर का पैड नजर आया था। उस दोनों ने ये फैसला किया की हम इन बच्चो का जन्म क्यून हम यहा पर किया जाये। तब उस दोनों ने नए ढंग से ओर खुशखुशाल ओर प्रेम से दोनों ने एक बहुत ही सुंदर घोचला बनाया गया था। इसके बाद नर ओर मांदा दोनों कौआ अपना बच्चा आने तक वह इंतजार करने लगा था। तब मित्रो इन दोनों का ही ये इंतजार करने के समय जल्दी ही समाप्त हो गया था। तब उस मांदा कौए ने उसने चार इंडो का जन्म दिया था। तब नर ओर मांदा ये बच्चो का जन्म देकर वही इतने खुश थे की उनकी खुशी कहा पर समा नहीं रहे थे ओर उस पर ध्यान ही नहीं दिया था। उस बर्गर के पैड पर जिस उन्होने घोचला बनाया था वह एक साप भी वाहा पर रहता था। एकदिन नर ओर मांदा खोराक की तलाश करने के लिए वह जंगल मे खोराक ढुढ़ने के लिए गए तब साप ने मौका पाकर उन्होने उन कौओ का अंडो को खा लिया था ओर जाकर वह अपना बिल मे चला गया। जब मांदा ओर नर कौआ जब खोराक लेकर वापस आए तब उनहोने देखा की उस घोसले के अंदर एक भी इंडा नहीं था तब वह दोनों बहुत ही परेशान हो गए ओर उसमे से मांदा कौआ अपना इंडो का दुख सहन न करपाई ओर कूट कूटकर वह रोने लगी थी। लेकिन नर कौए ने उन्होने समजाया ओर धीरज रखने के लिए कहा।   

उसके बाद कई दिन चले गए ओर मांदा कौआ फिर से गर्भवती बन गया था। तब उन्होने फिर से अपने इंडो का जन्म दिया। लेकिन मित्रो इस बार दोनों के खुशी के ज्यादा उस दोनों का यह भय था की हमारे अंडे फिर से कोई खा नहीं जाये इस बात का भय था। एसेमे उस दोनों ने सोचा की इसबार हम दोनों कही सूपकार से देखे की कौन हमारे बच्चों ले जाता है। इसके बाद दोनों एक बर्गर के पैड के पास एक पैड था उसमे से दोनो चेल गए उन्होने वह से देखना तरीका सोचा कौन हमारे अंडो को ले जाता है। जैसे ही उस साप ने सोचा की नर ओर मांदा दोनों कौआ भोजन के लिए बाहर चले गए है फिर वह साप घोसले पर पुहोंस कर वह फिर से उस कौए के अंडो को खाने लगा। नर ओर मांदा दोनों ये सब देख रहे थे। पर क्या करे साप इतना शक्तिशाली था की उस दोनों कौआ को रोने के सिवाय ओर कौस भी सारा बही था। तब रोते हुहे नर कौए ने मांदा कौए से कहा की हमरे पैड पर एक साप आ गया अब वो साप हरबार हमारे अंडे खा जाएंगा इसलिए भलाई उसमे है की हम अपना घोंचला कई दूसरे जगह पर बनाए। ये बात सुनकर नर कौए ने कहा की ये बात तुम्हारी तो सही है। क्यूकी हम साप जीतने शक्तिशाली नहीं है। एसेमे ये जगह छोड़कर हमे कई ओर चले जाना चाइए। कई जाने से पहले अपने मित्र गीदड़ से हम मिलकर आते है। ये कहने के बाद उस दोनों अपने मित्र गीदड़ के पास पुहंसे ओर उस दोनों के कौए ने अपनी पूरी व्यथा उस गीदड़ को बताई। ये बात सुनकर जब गीदड़ नेखा की मनाकी तुम्हारा शत्रु बहुत ही बलवान है जिसे तुम बल के सिवा तुम उसको हरा नही सकते लेकिन उसे हम बुध्दिशाली से हम उसको हरा सकते है। ये बात सुनकर वह नर कौए ने कहा की भला हम उस साप का हम क्या बिगाड़ सकते है। लेकिन हमे उससे जो भी कहा तो हमे वही हम दोनों को खा जाएंगा। ये बातसुनकर फिर से गीदड़ बोला तूम मेरी एक बात मानलों जिसक बाद तुमहार जहा भी मन हो वहा पर तुम चले जाना। तब ये बात सुनकर दौने उसकी बात सुनी! तब वह गीदड़ ने बात करना शरू किया… 

यहा एक दूर से जंगल को छोड़कर एक नदी आती है जहा एक राजकुमारी उस नदी पर प्रतिदिन वह नाहने आती है ओर जब वह नदी मे स्नान करती है तब वह अपने आभूषणो को एक जोली मे मुक देती है जिसके रक्षा उसके सैनिको करते है। तुम डोनमो को बस इतना करना है की उन आभूषणो मे से तुम्हें कोई क़ीमती हार तुमको चुराकर कर लाना है ओर उस साप की बिल के सामने तुम्हें रख देना है बाकी जो होंगा की ये तुम आपनि आंखो के सामने ही देखोंगे । गीदड़ के बताया अनुसार दोनों कौहे ने उस नदी के पास पुहंसे ओर वह कीमती हार चुराया ओर उस हार को उसने उस साप के बिल के सामने ही रख दिया। तब वह मांडा कौआ इतना भागा की वह सैनिको को गुल्ली मारकर वहा से चला गया ओर सैनिको वाहसे उस नदी के किनारे वापस गए थे। तब वह राजकुमारी देखा की वाहसे मेरा हर कोई चुराकर ले लिया है तो वह छिपायों पर वह गुस्सा हो गई ओर गुस्सा होकर उस सैनिको ने उस हार को ढुढ़ने के लिए कहा फिर सारे सैनिको उस हार को ढूँढने के लिए निकले बहुत ढूंढा लेकिन कोई एक सैनिक की नजर उस साप के बिल के बाहर जो कौए ने वह हार रखा था वहा पर पड़ी थी ओर वह हार लेने की लिए वह सब सैनिको बुलाया उस बर्गर के पैड पर आ गए थे। तब कोई सिपाही ने उस हार को लेने जा रहा था तब उस साप बाहार आ गया ओर उसे लगा की खतरा है तो वह बाहर आ गया तब वाह सब गुस्से सिपायओ ने उस साप का मुह चुंथ दिया यानि की उस साप को मार दिया था। तब उस दौनों कौआ ने उस शक्तिशाली शत्रु का उसने अपनी बुद्धि से उसको हरा दिया। 

तो मित्रो हमे इस चाणक्य की कथा के अनुसार हमे ये सीख मिलती है की अगर हमारा शत्रु हमसे ज्यादा बलवान है तो उसे बल से नहीं बल्कि हमे उसे बुद्धि से हरा देना चाहिए। क्यूकी मित्रो इस संसार मे बुद्धि से ज्यादा इस संसार मे दूसरी चिंज हे ही नहीं। पर एसा नहीं होता है तो पांडव भी कृष्ण को नहीं बल्कि उसकी नारायणी सेना को जोड़ते है। 

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