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क्या हिन्दू धर्म में शादी से पहले कुंडली मिलाना जरूरी है ?

क्या हिन्दू धर्म में शादी से पहले कुंडली मिलाना जरूरी है ?


नमस्कार मित्रो हम आपका स्वागत करते है। विवाह एक पवित्र सबंध है। विवाह एक एसा सूत्र है जहा दो लोग केवाल वह दो परिवार का मिलन ओर सबंध होता है। इसलिए दोनों को विवाह करने के लिए वह विवाह उतरदाई बन जाता है की   वो अपना जीवन के साथ वह अपने परिवार ओर अपना जीवन साथी का बहुत अच्छी तरह से अपना ख्याल रखे। दोनों यानि की पति ओर पत्नी अपना कर्त्वय ठीक तरह से निभाय इस तरहा शादी से पहले इन दोनों की कुंडली मिलनी जरूरी है की नहीं ये हिन्दू धर्म मे महत्व दिया जाता है। यदि इस पति ओर पत्नी मे सबंध मे दोनों अच्छी तरह से वह घनिष्टा, गहेनता, मित्रता ओर सामंजस्य से होना बहुत ही आवश्यक है। पूरा जीवान आप साथ मे व्यतीत करने के बाद वर वधू दोनों विवाह के दिन जीवन के अंत तक दोनों साथ निभाना एक वचन देता है। इसलिए कहा जाता है की जीवन मे साथ निभानमा वाला बहुत अच्छा मिल जात आ है तो पुरुष कोई भी कठिन परिस्थिति सामने क्यू न आ जाये उसे सुलजाने के लिए बस जीवनसाथी का साथ जरूरी होता है। यदि इस सबंध मे प्रेम, विश्वास जिसमे नहाई है इन दोनों का जीवन बिताना बहुत ही कठिन हो जाता है। इसी कारण सनातन धर्म हिन्दू धर्म मे मे कहा गया है की विवाह के पहले आपको कुंडली आपको दिखनी चाहिए।

हिन्दू धर्म मे कुंडली क्या होती है ? 

मित्रो ये बात सही है की व्यक्ति के विवाह के पहले उन दोनोंकी ग्रह मिलने चाहिए। ये बात तो सही है की व्यक्ति के ग्रह के पहले व्यक्ति के जीवन के बारेमे ज्योतिष बहुत सारी भविष्यवाणी बताते है। ग्रह व्यक्ति के जीवन के बारेमे बहुत कुस कहता है। ग्रह नक्षत्रों के आधार पर ही दो लोगो की कुंडली को मिलाकर यह देखा जाता है की दोनों के ग्रह भविष्य मे आने वाली किस प्रकार की परिस्थिति को जन्म देता है। व्यक्ति की कुंडली उनकी राशि के नाम से उसका समय, नाम, जन्म, स्थान आदि के आधार पर व्यक्ति की कुंडली देखा जाती है। यहा तक कि कुंडली मे व्यक्ति के बारे मे यह भी पता लगाया जा सकता है की लड़का ओर लड़की विवाह के पश्यात एकदूसरे के साथ वह भाग्यशालि या सुखद अपना जीवन व्यथित करंगे की नहीं। यहा तक की दोनों के एक ग्रह के आधार पर कैसा असर डाला जाता है ओर इसके बाद इन दोने के बाद उसका परिणाम क्या आता है वही भी पता हम कुंडली के सहारे हम पता चल जाता है। तो आइये दोस्तो दोनों के कुंडली पर हिन्दू धर्म मे कौन कौन सी बाटो का ध्यान दिया जाता है।  
विवाह के लिए दो लोगो का 36 गुण मे कम से कम 18 गुणो मिलना का बहुत ही आवश्यक होता है। विवाह के पहले दो लोगो की कुंडली मिलाई जाती है जिसमे लड़के कुंडली मे बहू विवाह योग, विदुर योग ओर मार्ग भटकनेका योग देखा जाता है। बहू विवाह योग मे कुंडली के द्वारा यह देखा जाता है की जिसमे लड़के जीवन मे एक से अधिक विवाह नहीं हो। जिसमे दुसर है विदुर योग मे देखा जाता है की वह लड़के क उसकी पत्नी के साथ उसका सबंध कैसा होंगा। दोनों मे कोई एक का क्लेश या भेदभाव के गृह नहीं तो बन रहे ना ओर लड़की कोई कारनोसर मुर्त्यू  या फिर उसस्की कोई अकाल मुर्त्यू  तो नहीं हो जाती है। इसालकिए हमे इन बातों पर हमे विशेष ध्यान देना चाहिए। मार्ग भटकता ये अर्थ है की जिसमे लड़का गलत आदते जिसमे लड़का शराब के नशा, जुगार, असत्य , व्यभिचार इन सभी का मार्गो वह अनुचरण नहीं करे इसलिए कुंडली दिखे जाती है। इस कारण लड़की जीवन बहुत ही काठी बन जाता है। यदि विवाह ओर कुंडली ये सारे दोष आ जाते है उसमे बहुत प्रकार के दोष ओर जीवनमे बहुत सारी कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ता है। 
वही लड़की की कुंडली देखा जाये तो वह उसमे वैधव्य योग, विषकन्या योग ओर बहुपति योग देखे जाते है। उसमे पहाला है वैधव्य योग मे देखा जाये तो उसमे उन दोनों के विवाह के बाद उन दोनों की अकाल मुर्त्यू तो नहीं होंगी ये सब बाते उसमे दिखे जाती है। फिर कुंडलीमे ये देखा जाता है की लड़की कुंडली मे कोई विषकन्या योग तो नहीं है ना। क्यूकी विषयोग के कारण लड़की अपने जीवनमे कभीभी सुखी नहीं हो पाती है बल्कि वह अपनी पूरी जिंदंगी मे वह दुखदायक ही जीवन बिताती है। बहुपति योग मे देखा जाता है की  लड़की कुंडली मे एक से अधिक विवाह न हो जाये इसलिए कुंडली देखना जरूरी बनाता है। इसका समाधान करने के लिए लड़की विवाह किसी वृक्ष से करावा जाता है। जिस कारण इस दोष को बहुत तरह हम सुलजा सके ओर अच्छी तरह से हम दोनों के विवाह कराव सके। वर ओर क्लान्या के ककुंडलि के आधार पर कुल 8 गुण का उसमे विश्लेषण किया जा सकता है। इन गुणो की संख्या पर ही उन गुण की संखा का आधार क्रम माना गया है। 

वर और वधू में कौन से गुण समान होने चाहिए।

जैस उसमे पहला क्रम, दूसरा क्रम, तीसरा क्रम आदि जैसा उसमे किया जाता है। स प्रकार सभी गुण का अंक 36 हो जाता है। इसलिए ही कुल मिलाकर इन 36 गुणो का आंखेलन करके उसमे निरधारित किया जा सकता है की दोनों एकदूसरे विवाहके लिए दोनों काबिल है या नहीं इसलिए इन दोनों की कुंडली देखने पड़ती है। तो दोस्तो जानते है ये आंत गुण कौन से है। 

1. वर और वधू में वर्ण गुण होने चाहिए।

जिसमे वर ओर कन्या वर्ण अथवा जाती का मिलन किया सकता है। वर का वर्ण कन्या से बढ़कर यानि की उच्च ओर समान होने चाहिये। इस गुण मे दोनों का मत सामाजिक रूप से देखा जा सकता है। 
2. वर और वधू में वश्य गुण होने चाहिए।  
वश्य का गुण होता है दोनों मे से कौन सबसे बड़ा प्रभावशाली है। जिसमे दोनों मे से किसकी जीवनसाथि की उसमे कौन सबसे ज्यादा नियत्रीत क्षमता कर सकता है। 

3.वर और वधू तारा गुण होना चाहिए। 

जिसमे दोनों की यानि की वर ओर कन्या की नक्षत्रो की तुलना की जा सकती है। यह दोनों के मत सबंध मे स्वस्थ भागफल को दर्शाता है ओर दोनों किसनसे ज्यादा किसकी प्रबल शक्ति ज्यादा होती है। 

4. वर और वधू योनि गुण होना चाहिये। 

इसमे दोनों के योंन संगता को देखा जा सकता है। जिसमे दोनों का एक ही योनि कुंडली दिखे जा सकती है ओर दोनों की एक ही योनि होनी चाहिए। 

5. वर और वधू गृह मैत्री होनी चाहिए। 

इस गुण की द्वारा जांस की जाती है की इन दोनों की मैत्री का व्यव्यार कैसा होता है। वर ओर वधू के विचार ओर मानसिक ओर बौद्धिक क्षमत कैसी होती है ये सब गुण गृहमैत्री के कारण होती है। इसलिए सब गुण होने चाहिए। 

6. वर और वधू गण होना चाइए। 

यह गुण दोनों के व्यक्तित्व ओर दर्ष्टि गुण के सामान्य से वह सामाजिक से वह गुण दर्शाता है। जिस मे ये दोनों की कुंडली बहुत अधिक मात्रा मे पायी जाती है। 

7.वर और वधू भकुट गुण होना चाहिये। 

इन दोनों की आधार पर उसकी कुंडली देखा जा सकता है के भविष्य मे परिवर्तन, परिवार, कल्याण ओर उसकी समृद्धि कैसी होंगी उसका वर्णन की जा सकता है। जिसमे भविष्य मे उन दौनों खुश रहेगे या नहीं ये बात का उल्लेख या पर किया जा सकता है। 

8. वर और वधू नाड़ी दोष समान होना चाहिये। 

इस गुण का अंक सबभी गुणो मे इस गुण का अंक बहुत ही अधिक है। इसलिये इस गुण को इन सभी गुणो से अधिक महत्व दिया जाता है। इस गुण का सीधा सबंध संतान उत्पति से है। यदि दोनो की नाड़ी एक है तो मन लेना के उसके संतान पर दोष पाये जा सकते है। इस गुण का आंकल्न बल्ड ग्रुप के आधार पर किया जा सकता है। यदि वर ओर कन्या का बल्ड ग्रुप है तो संतान के स्वास्थ्य पर उसका असर नकारात्मक होता है। नाड़ी दोष कुंडली मे सबसे बड़ा दोष है। इसलिए सनातन धर्म मे समान नाड़ी वाले लोगो का विवाह को ठीक नहीं माना गया है। 
कुंडली मिलान से याहू निर्धारित किया जा सकता है की प्र्तेयक दर्ष्टि गुण से वर ओर कन्या एकदूसरे के प्रति बहुत ही भाग्यशाली हो ओर दोनों का जीवन बहेतरीन तरीके से बीटा सके है। इसलिए हमे विवाह करने के पहले हमे कुंडली दिख लेनी चाहिए।   

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