क्या हुआ जब कृष्ण की मूर्ति टूटने पर बुलाया बूढ़ी अम्मा ने डाक्टर? | कलियुग की कथाएं भाग – 10
नमस्कार दोस्तो हम आपका स्वागत करते है। ईस विपरत कालमे हरिभजन का जरिया हे। जो भी मोक्ष को पाने के लिए जो हरि का नाम लेंगा हरी उसे बचाने के लिए इस कलियुग मे भगवान का रूप धारण करके हमे बचाने आते हे। इसी बातों लेकर हम आए हे कलियुग की कुस एसी कथा हे जिन्होने धर्मोमे हिन्दू की आस्था को ओर भी ज्यादा प्रबल किया था। एसी कड़ी मे हम लेकर आये है इस कलियुग की इस कथा है की जिसमे कृष्ण भक्ति की अपर श्रद्धा से ओर उसकी भक्ति मे जिस इस निर्जीव मूर्ति मे भी उसमे भगवान श्री कृष्ण को दिखा।
बूढ़ी अम्मा की कृष्ण भक्ति की कथा।
बहोत समय के पहले की बात है किसी नगरी मे एक लड़की रहती थी। उसका परिवार बहुत ही भक्तिमय ओर धरमीक श्रद्धा मे जुड़ा हुआ था। इस लड़की यही वजह यही वही बचपन से ही वही भक्तिमय ओर धार्मिकमाय बनाना चाहतील थी। वह लड़की हर मास वह भगवान श्री कृष्ण के लिए लाडु लेकर वह वृदवान जाती थी ओर वह पर भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करते ही वह वापस अपने घर लौट आती थी। धीरे धीरे समय बीतता गया ओर वह बड़ी हो गई। बड़ी होकर ही उसने वृदवान जाना नहीं छोड़ा था। जब की कुस समय बाद उस लड़की शादी हो गई। शादी होने के बादभी वह वृदवान जाने का नहीं छोड़ा था। जब की कुस साल ओर बित गए थे ओर उसे बच्चे भी हो गए ओर बच्चे भी पैदा हो गए थे ओर उन बच्चे भी पैदा हो गए थे उस बच्चो की शादी भी हो गए थी तबभी उस लड़की ने वृदवान जाना नहीं छोड़ा था। जब की उस लड़की बहुत बुध्धी होने पर ही वह चल नहीं पा रही थी तभीभी वह चलकर वृदवान जा जाकर वह लाडु धरा दिये थे ओर वह से उन्होने भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति घर लाकर उसकी पूजा करने लगी थी।
एकदिन की बात है की उसने जब अपनी बहू से कहा की जरा मेरी लड्डू गोपाल की मूर्ति तुम उस मूर्ति को जरा कमरे मे रख दो। तब बहू ने अपनी सांस के हाथ से वह मूर्ति ले ली ओर उसकी बहू ने मूर्ति को कमरेमे रखने के लिए जा रही तब वह मूर्ति अपने हाथो से गिर पड़ी ओर टूटने पर बहुत ही आवाज आने वह बुधिया बहुत घभराह गई ओर वह ज़ोर से चिल्लाने लगी। तब उसके मुह से आवाज निकल गई की कहा क्या हुआ बहू मेरे लाडु गोपाल गिर गई क्या ? तब बहू ने कहा की जी हा माँ मेरे हाथो से ये भगवान कृष्ण की मूर्ति गिर गई। यह बात सुनकर उसकी सास बहुत ज़ोर से चिल्लने लगी ओर रोह रोह कर कहने लगी जाओ अब तुम डॉक्टर को जाकर बुला लाओ। जाओ मेरे लड्डू गोपाल लो चोट लग गई होंगी। अपनी बात सुनकर वह बहू थोड़ा सा मुस्कराई ओर उसे लगा की मेरी सन्न्स मेरे साथ मज़ाक करने लगी। ओर तब उसे सोचा की ये भूधिया पागल हो गई है। जब श्याम को उसका पति घर आया तब उस बहू ने सबकुस बता दिया था। तब उसके पति ने कहा की जाओ अब माँ पागल नहीं हो जाये ओर उससे कहो शांति रखे ओर थोड़ी ही डेरमे सबकुस ठीक हो जाएंगा। ये बात सुनकर वह बहू के पति बहुत मनमे कई तरह के ख्याल आने लगे ओर उसे लगा की क्यू मे मेरी माँ को पागलखाने पर भेज दु ये बात अपनी पत्नी को बात बताई ओर दोनोंने निर्णय ले लिया पागलखाने पर भेज देना का निर्णय किया ।
तब सब कहते है ना भगवान हमेशा अपने भक्तो की सदाय मदद करते है। पर इस कथा मे वैसा ही हुआ। तब उनके पड़ोस मे एक बहुत ही शुशील ओर समजदार आदमी रहता था। उसे उस बुधिया को बेटे को पाने पास बुलाया ओर समजाते हुहे कहा ” देखो बेटा बचपन ओर बुढ़ापा एक ही जैसा होता है। इसलिए तुम एक काम करो जाकर तुम एक डॉक्टर को बुला लाओ तब आपको उस डॉक्टर को पहले से ही समजा लेना है की तुंहर एक मूर्ति की जांस कर देनी है”। तब वह बुधिया का बेटा बोला लेकिन इस मूर्ति की जांस करने के लिए कौन भला या पर आता है। तब उस आदमी ने कहा बेटा जब डॉक्टर को पैसा मिलेंगा तो अवश्य ही यहा पर आएंगा। इस कारण तुम्हारी माँ को पागलखाने भी नहीं जाना पड़ेंगा ओर उसकी जिद भी ठीक तरह पूरी हो जाएंगी। उस आदमी की बात सुनकर उसे अच्छा लगा ओर तब वह एक डॉक्टर के पास पुहांसा ओर समजा दिया ओर तब वह डॉक्टर भी राजी हो गया। तब अगले दिन ही वह डॉक्टर उस बुधिया के घर गया ओर आकर ही कहा उस डॉक्टर ने माँ कहा गया है ये तुमहार लाडु गोपाल कहा गया है। तब वह बुधिया ने कहा आओ डॉक्टर सब आओ देखो क्या हो गया है मेरे लाडु गोपाल को क्या हो गया है। तब वह डॉक्टर ने उस बुध्धी माँ को कहा की इस मूर्ति मे जान ही नहीं रही देखो कैसे कुस नहीं बोल पा रही। ये बात सुनकर बुधिया को बहुत ही गुस्सा आ गया। तब गुस्से होकर उस डॉक्टर ने कहा तुजे कितने साल हो गए ये डॉक्टर बनने के लिए। तब वह डॉक्टर ने जवाब दिया मेरा 40 साल हो गए डॉक्टर बनने का पर क्यू ? तब उस बुधिया ने उतार दिया की तुम्हें चालीस साल हो गए डॉक्टर बननेमे तुमको ये पता नहीं है की मरीज का हाथ देखकर उसकी तबीयत नहीं देखा जाती है। ये सुनकर डॉक्टर ने कहा शायद मौजे अपना काम जल्दी ही पता देना चाहिए। तब उसने जल्दी उस लड्डू क गोपाल को हाथ देखकर कहा कुस नहीं तेरे लड्डू गोपाल को।ये बात सुनकर तब बुधिया बोली की डॉक्टर सही से देख एसा नहीं हो सकता है। तभी उस डॉक्टर ने कहा अब कुस नहीं है इस तेरी मूर्ति मे यह मूर्ति जल्दी ही खतम हो गई।
तभी उस बुधिया क डॉक्टर पर यकीन नहीं आया है तो वह फिर से बोली तुम्हारे पास जो मशीन हे जरा उनसे तपासों ना। यह बात सुनकर उस डॉक्टर ने उस मूर्ति को फिर से छाती पर तपास की ओर तब उस मूर्ति मे ज़ोर ज़ोर से हदय के ढबकारे की आवाज आने लगी। तब यह सुनकर भी डॉक्टर हैरान हो गया था। उसे अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। उसने कई बार सुना पर उसमे धक धक की आवाज ही सुनाई दे रही थी। इसके बाद उस डॉक्टर ने बुधिया के पाव पकड़ लिए ओर कहा ” ये दुनिया तुम्हें पागल कहती है ना पर असल मे यह दुनिया ही पागल है, जो इस मूर्ति मे यूंहारे पीछे हुई तुम्हारी भावना को नहीं मीने सुना पर इस मूर्ति मे जान नहीं थी पर यह तो तुम्हारी श्रद्धा ओर भक्ति के कारण उस मूर्ति मे जान आ गयी।
तो मित्रो आपको इस आज की इस कलियुग की कथा आपको कैसी लगी, उम्मीद करता हु की आपको अच्छी हिओ लगी होंगी। तो मित्रो नमस्कार।
